Monday, November 29, 2010

Resent newsABVP


ABVP Candidate won the post of General Secretary (GS) in MS University Students Union, Vadodara ( MSUSU)

The Akhil Bhartiya Vidhyarthi Parishad (ABVP) won the DAV (PG) College students’ union election. Anshul Chawla, was elected president of the DAV CABVP wins three top posts in DUSU polls

Jitender Choudhary of (MA, Budhist Studies) won the post of Chairman while Priya Dabas won the post of Vice President.

Neetu Dabas was elected the new Secretary while Akshay Kumar of NSUI was elected Joint Secretary.

Jitender defeated...

ABVP Captured the Rajasthan University Student Union (RUSU) polls

RUSU's top two posts of president and vice-president won by ABVP's Manish Yadav and Meenakshi Meena.....ollege students council, in Dehradun on Wednesday.

Sunday, November 21, 2010

कानून व संविधान के तहत ही मंदिर बने

आयोध्या मामले में अदालत के निर्णय से पहले सरसंघचालक श्री. मोहनजी भागवत ने मंगलवार को कहा कि वह विवादास्पद स्थल पर संसद द्वारा बनाए गए कानून के माध्यम से राम मंदिर के निर्माण के पक्ष में हैं और अयोध्या मामले पर अदालत के फैसले पर संघ की प्रतिक्रिया 'कानून एवं संविधान' के दायरे में होगी।

इंडियन विमेंस प्रेस कॉर्प द्वारा आयोजित एक वार्तालाप में महिला संवाददाताओं से बात करते हुए उन्होंने कहा, “निश्चित तौर पर, हिंदू समाज की आकांक्षा है कि रामजन्मभूमि पर मंदिर बनाया जाना चाहिए। इस संबंध में फैसले पर हमारी प्रतिक्रिया इन इच्छाओं के अनुरूप होगी। हम सुनिश्चित करना चाहेंगे कि वहां राम मंदिर का निर्माण हो

अदालत के निर्णय के बारे में पूछे जाने पर सरसंघचालक ने कहा, “फैसला आने के बाद ही हम प्रतिक्रिया दे सकते हैं, आगे के कानूनी विकल्प भी मौजूद होंगेउन्होंने संकेत दिया कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय का फैसला जिस संबंधित पार्टी के पक्ष में नहीं जाता है, वह उच्चतम न्यायालय जा सकता है।

इस विषय में 24 सितंबर को अदालत का फैसला आने के बाद कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न होने की आशंकाओं के बारे में बार बार पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि फैसले पर संघ की प्रतिक्रिया 'कानून, संविधान औरलोकतांत्रिक सीमाओं में' होगी। भागवत ने पत्रकारों से कहा, 'हमारे तरफ से कोई झंझट नहीं होगा।'

मोहनजी भागवत ने कहा, “हम समाज में किसी तरह का विभाजन नहीं चाहते, हम इसे हिंदू-मुस्लिम विवाद के रूप में नहीं देखते बल्कि इसे हम राष्ट्रीय मूल्यों के आदर के रूप में देखते हैं। वास्तव में अगर मंदिर बनता है तो इससे समाज में एकता स्थापित करने में मदद मिलेगी

यह पूछने पर कि क्या इस मुद्दे पर वह बाबरी मस्जिद ऐक्शन कमिटी से वार्ता करेंगे तो उन्होंने कहा कि समाज में खाई को कम करने के लिए आरएसएस धार्मिक नेताओं के साथ वार्ता कर रहा है लेकिन मंदिर मुद्दे पर कोई भी वार्ता मंदिर आंदोलन के 'संतों' की समिति की परिधि में किया जाएगा।

यह पूछने पर कि क्या मंदिर मुद्दे पर भाजपा के रूख से आरएसएस हताश है ?तो उन्होंने कहा, 'राम मंदिर आंदोलन से भाजपा को सहायता मिली है। परन्तु इस बारेमें निर्णय भाजपा को ही करना होगा. बहरहालअपने आंदोलन को चलाने के लिए हमें किसी के सहयोग की जरूरत नहीं है।'

भगवा आतंकवाद ग़लत

गृह मंत्री के भगवा आतंकवाद से देश को खतरे और संघ के कुछ कार्यकर्ताओं के बम विस्फोटो की जांच में नाम सामने आने परसरसंघचालक ने कहा किभगवा आतंकवादसही शब्द नहीं है.

जहां तक संघ के कुछ लोगो के नाम है, आरएसएस इन्हें अपवाद के रुप में देखता है और अगर कोई पकड़ा जाता है तो कानून को अपना काम करना चाहिए.

लेकिन उन्होंने गृह मंत्री पी चिदंबरम को आड़े हाथों लेते हुए कहा, ''ये कुछ ताक़तो के देश को बदनाम करने की कोशिश है. जब आप भगवा आतंकवाद कहते है तो कहते है कि ये देश के अंदर पैदा हुआ आतंकवादहै. दुनिया के सामने इसका क्या संदेश जाएगा. लोग हमें अराजक देशकहेंगे. गृह मंत्री को ज़िम्मेदारी से शब्दों का चयन करना चाहिए. हिंदू और आतंकवाद कभी साथ नहीं हो सकते.’’

कश्मीर

कश्मीर की स्थिति और स्वायत्तता के सवाल पर उन्होंने कहा, 'हम आजादी या स्वायत्तता जैसे शब्दों को पसंद नहीं करते। हम अलगाववादियों से बात करने की जरूरत नहीं समझते। हमारा मानना है कि कश्मीर को पूरी तरह भारत में मिला देना चाहिए।'

उनका मानना है कि सरकार का रूख और नीतियां इसी विचार पर आधारित होनी चाहिए न कि क्षेत्र के साथ अलग व्यवहार करना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि कश्मीर के लोगों में विश्वास बढ़ाने की जरूरत है।


massive Protest meets all over Bharat

हिन्दुत्व तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को आतंकवाद के साथ जोड़ने के षड्यंत्र तथा इसके निमित्त चल रही दुष्प्रचार की राजनीति के विरोध में कल दि. 10 नवंबर 2010 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के आह्वान पर देश के कोने-कोने में अभूतपूर्व धरना एवं निषेध सभाएं सम्पन्न हुईं।

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चेन्नई में आयोजित निषेध सभा

बिहार एवं झारखण्ड को छोड़ कर सभी राज्यों के प्रमुख जिला केन्द्रों पर 700 से अधिक स्थानों पर 10 लाख से अधिक नागरिकों ने इन निषेध सभाओं में भाग लेकर अपना विरोध दर्ज किया है। इन सभाओं को समाज के अग्रणी संत, सामाजिक नेता तथा संघ के पदाधिकारियों ने सम्बोधित किया। समाज के सभी वर्गों के लोग, बड़ी मात्रा में महिलायें तथा मुस्लिम समुदाय भी इन निषेध सभाओं में सहभागी हुआ।

Bangalore meet

बंगलोर सभा का दृश्य

अपना विरोध दर्ज कराने के लिये संघ के समर्थन में समाज के इस विधायक प्रतिसाद पर रा. स्व. संघ के सरकार्यवाह श्री सुरेश (भैया जी) जोशी ने संतोष व्यक्त करते हुए सभी के प्रति आभार प्रदर्शित किया तथा विश्वास व्यक्त किया कि देश की जनता राष्ट्रविरोधी तत्वों के इस दुष्प्रचार से भ्रमित नहीं होगी। उन्होंने यह भी विश्वास व्यक्त किया कि जनता विभाजनकारी राजनीति का डटकर विरोध करेगी तथा देशहित में संघ को सदैव उसका समर्थन और सहकार प्राप्त होता रहेगा।

(डॉ. मनमोहन वैद्य)

अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख

Peaceful protest meets in all districts of Bharat

11 November 2010

Responding to the appeal of Rashtriya Swayamsevak Sangh, a large number of people participated in the peaceful ‘Dharna’ [sit-in] meetings in all districts of Bharat. The Sangh has called these protest meets to raise voice against the political conspiracy to link terror tag with Hindu society under various names like ‘Saffron terror’ etc.

More than 9 lakh people participated in the protest meets arranged at over 700 places in all states of Bharat except Bihar and Jharkhand. Many prominent saints, social workers, and RSS functionaries addressed these meetings which were attended by the entire cross section of the society including a prominent presence of women and Muslims.

The Sarkaryavah Shri. Bhaiyyaji Joshi has welcomed this very determined and positive response of people and expressed gratitude towards all who participated in these meets. He said that he is confident that the people will never be misled by the misleading propaganda, they will strongly oppose such divisive politics and shall always support the Sangh in the issues of national interest.

Dr. Manmohan Vaidya

Akhil Bharatiya Prachar Pramukh

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देश के विभिन्न जिलों में आयोजित सभाओं के दृश्य

संघ की प्रान्त रचनानुसार धरना सभाओं की संख्या तथा उपस्थित नागरिक

प्रांत
स्थान
कुल संख्या
केरल
15
50200
द.तमिलनाडु
19
10597
उ.तमिलनाडु
14
7500
द.कर्नाटक
18
47050
उ.कर्नाटक
15
25450
प.आंध्रप्रदेश
13
61270
पू.आंध्रप्रदेश
11
19000
कोकण
06
18400
प.महाराष्ट्र
23
8270
देवगिरी
12
5425
गुजरात
39
20900
विदर्भ
12
18060
मालवा
45
84008
मध्यभारत
65
35500
महाकौशल
28
10873
छत्तीसगढ़
28
33899
चित्तौड़
12
65740
जयपुर
11
36842
जोधपुर
10
33400
दिल्ली
05
30500
हरियाणा
21
16000
पंजाब
26
24295
जम्मूकश्मीर
07
1600
हिमाचल
14
18000
उत्तरांचल
16
36000
मेरठ
07
16600
ब्रज
08
16000
कानपुर
17
10000
अवध
07
8000
काशी
10
21000
गोरक्ष
10
8000
उ.बिहार
द.बिहार
झारखंड़
उत्कल
37
12854
द.बंगाल
18
7835
उ.बंगाल
07
3500
उ.असम
20
4613
द.असम
09
2690
कुल
635
920871