Sunday, November 21, 2010

संघ पर आतंकवाद का आरोप राजनीति प्रेरित

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबले ने संघ-विरोधी राजनीति को धिक्कारते हुए कहा कि संघ पर आतंकवाद का आरोप राजनीति प्रेरित है और यह संघ-रूपी राष्ट्रीय अभियान के साथ धोखा है।

dattatraya ji speaking

लखनऊ के निरालानगर स्थित सरस्वती कुंज में एक सप्ताह से चल रहे अखिल भारतीय घोष शिक्षक प्रशिक्षण वर्ग का समापन करते हुए श्री होसबले ने कहा कि संघ खुले मैदान में कार्य करता है, घर-घर जाकर सम्पर्क करता है और स्वयंसेवक एक लाख 57 हजार सेवा कार्य कर रहे हैं। उन्होंने पूछा कि क्या कोई आतंकवादी संगठन भी सेवा कार्य करता है? बिना कांग्रेस का नाम लिये उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय आपदाओं में चाहे वह चीन का हमला हो या कश्मीर को भारत से जोड़ने की बात, यही पार्टी स्वयंसेवकों को बुलाती रही है, परन्तु आज अपने स्वार्थ साधने के लिए संघ को, हिन्दू समाज को और सन्तों को बदनाम कर रही है। संघ पर आरोप लगाने वाले हिटलर के प्रचारमंत्री गोबेल्स के वंशज हैं, जो मानता था कि किसी असत्य का बार-बार प्रचार करने से जनता उसे सत्य मानने लगती है।

संघ को दुर्बल मानने की भूल न करे

श्री होसबले ने कांग्रेस द्वारा संघ कार्यालयों पर तोड़-फोड़ एवं विरोधी प्रदर्शनों पर चेताते हुए कहा कि कोई संघ को दुर्बल मानने की भूल न करे। संघ ने समाज को सत्य बात बताने के लिए अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग कर शान्तिपूर्वक धरना दिया है। संघ ने आपात्काल से लेकर आज तक दमन और अत्याचार का विरोध करने के लिए सत्याग्रह किया है। उन्होंने कहा कि संघ ने तो लोकतंत्र का सहारा लिया, परन्तु पिछले दो दिनों से कांग्रेस कौन सा लोकतंत्र चला रही है? संघ ने तो सौजन्यतावश खेद प्रकाश भी कर दिया।

श्री होसबले ने कहा कि संघ पर हमले करके या प्रतिबंध लगाकर संघ को नहीं रोका जा सकता। यह बात संघ-विरोधी भी जानते हैं। क्योंकि समाज संघ के साथ है। संघ को प्रतिबंधित कर समाप्त करने का विचार उसी प्रकार है जैसे कोई वंशी को नष्ट करके यह समझे कि संगीत समाप्त कर देंगे।

उपस्थित स्वयंसेवकों के माध्यम से जनता का आह्वान करते हुए श्री होसबले ने कहा कि संघ परिवर्तनकारी शक्ति है। संघ समाज को विदेशी व्यामोह से मुक्त करना चाहता है। इसके लिए हर स्वयंसेवक को अपने घर से इसे शुरू करना होगा। एक श्रेष्ठ, समृद्ध एवं वैभवशाली राष्ट्र का स्वप्न साकार करने के लिए सम्पूर्ण समाज को अपने साथ करना होगा। संघ की नित्यसिद्ध शक्ति ही समाज की रक्षा करेगी।

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इससे पूर्व देश के 39 संघ प्रान्तों से आये 249 घोष शिक्षकों के वर्ग के कार्यवाह श्री सुनील सिंह ने वर्ग की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस प्रशिक्षण वर्ग में स्वयंसेवकों ने प्रातः 4.30 से लेकर रात्रि 10 बजे तक लगातार विभिन्न वाद्यों का अभ्यास किया,जिसमें 6 घंटे वे मैदान में और शेष समय अपने कक्षों में बिताते थे। वर्ग का उद्घाटन दि. 9 नवम्बर को पूज्य सरसंघचालक श्री मोहन भागवत द्वारा किया गया था। कार्यक्रम के प्रारम्भ में वर्ग में भाग लेने वाले घोष वादकों द्वारा विभिन्न भारतीय रागों और व्यूहों का मनमोहक प्रदर्शन किया। इस समापन कार्यक्रम में हजारों आबाल-वृद्ध नर-नारियों ने भाग लिया।

समापन कार्यक्रम की अध्यक्षता सेना के सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर श्री धीरेन्द्र मणि त्रिपाठी ने की। उन्होंने स्वयंसेवकों के साहसिक घोषवादन की प्रशंसा करते हुए कहा कि स्वयंसेवकों का आत्मानुशासन स्तुत्य है।


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