अजमेर और हैदराबाद में 2007 में हुए बम धमाकों के सिलसिले में मध्य प्रदेश से संघ के एक कार्यकर्ता देवेंद्र गुप्ता की गिरफ्तारी के बाद से कथित हिंदू आतंकवाद चर्चा में है। हाल ही में गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने इसका उल्लेख किया और एक नई बहस इस पर चल पड़ी है। हिंदू या भगवा आतंकवाद और इसके संघ से रिश्ते पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के जाने-पहचाने चेहरे और इसकी राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य राम माधव से रूबरू हुए निर्मल पाठक
भगवा आतंकवाद संबंधी गृह मंत्री की टिप्पणी के बाद कांग्रेस ने कहा है कि आतंकवाद का कोई रंग नहीं होता।
कुछ लोग राजनीतिक मकसद के तहत भगवा या हिंदू शब्द को आतंकवाद से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। वास्तव में इस प्रकार का कोई आतंकवाद है ही नहीं। हम यह मान सकते हैं कि शायद आतंकवाद का कोई रंग नहीं होता, पर इसे जिहाद भी न कहो यह तर्क हमें स्वीकार्य नहीं है। आतंकवाद के रूप में जिहाद एक सिद्धांत है। माओवाद भी इसी तरह का एक सिद्धांत है। भगवा या हिंदू के साथ ऐसा कोई सिद्धांत नहीं है।
अगर भगवा आतंकवाद नहीं कहा जाना चाहिए तो इस्लामिक आतंकवाद भी नहीं कहना चाहिए?
हम कहें या न कहें, पर सच्चाई यह है कि दुनिया भर में तो कहा ही जा रहा है। मुस्लिम सुधारक भी इसे यही कह रहे हैं। भारत सहित पूरी दुनिया इससे पीड़ित है। हमारे यहां कुछ लोग इससे निपट पाने में अपनी विफलता छुपाने के लिए भगवा या हिंदू आतंकवाद का जुमला उछाल रहे हैं, जिसका अस्तित्व ही नहीं है। जैसा मैंने कहा, हिंदू समाज में न तो आतंक को लेकर कोई सिद्धांत है और न कोई फेनोमिना है।
संघ की अपनी एक छवि है। उसके कार्यकर्ताओं के आतंकवादी गतिविधियों में पकड़े जाने से क्या इस छवि पर असर पड़ा है? क्या आप चिंतित हैं?
बिल्कुल नहीं। एक डेढ़ साल के एक कालखंड में एक दो घटनाओं को हिंदुओं के साथ जोड़ा जा रहा है। चिंता वाली कोई बात ही नहीं है। 2007-2008 में कुछ लोग पकड़े गए जिसमें से एक दो संघ से संबंधित निकले। हम इसे बिल्कुल भी महत्व नहीं दे रहे। संघ गांव-गांव में काम कर रहा है। संघ की कार्यप्रणाली से लोग अच्छी तरह वाकिफ हैं। संघ न तो हिंसा में विश्वास करता है और न प्रोत्साहन देता है। हम चाहते हैं जो घटनायें सामने आई हैं, उनकी ठीक से जांच हो।
क्या देवेंद्र गुप्ता की गिरफ्तारी ने संघ को परेशानी में डाला है?
यह सही है देवेंद्र गुप्ता संघ का विभाग प्रचारक था और उसकी गिरफ्तारी दुर्भाग्यपूर्ण है। लेकिन उस पर आरोप क्या हैं? पुलिस का कहना है कि गुप्ता ने सुनील जोशी की मदद की जो हिंसा की गतिविधियों में शामिल था। ऐसे आदमी की मदद जो अब दुनिया में नहीं है। गुप्ता पर परोक्ष रूप से हिंसा में शामिल होने का आरोप है। अभी यह साबित नहीं हुआ है। हम कह रहे हैं कि जांच होनी चाहिए।
आरोप के बाद क्या संघ ने अपना घर ठीक करने के लिए कोई कदम उठाये हैं?
इसमें ठीक करने जैसा कुछ नहीं है। संघ के एकाध कार्यकर्ता पर आरोप लगा है। जांच हो रही है। हमारा मानना है यह संघ को बदनाम करने के प्रयास भी हो सकता हैं। ऐसे प्रयास पहले भी होते रहे हैं। गांधी की हत्या में संघ को शामिल करना ऐसा ही प्रयास था। इसलिए यह सतर्कता बरतने की आवश्यकता है कि कहीं संघ को बदनाम करने के लिए बाहरी लोगों ने फिर से षड्यंत्र शुरू तो नहीं किया है।
क्या समाज में ऐसा तबका है जो उग्रवाद का जवाब उग्रवाद से देना चाहता है?
हम नहीं मानते हिंदू समाज में ऐसा कोई तबका है। हिंदू शांतिप्रिय समाज है। मैं फिर कहना चाहूंगा कि हिंदुओं को इस तरह की घटनाओं से जोड़ने के पीछे कौन है इसका पता लगाया जाना चाहिए। कुछ विशेषज्ञों ने सुरक्षा तंत्र में नौकरशाही को इसके पीछे माना है। जिन घटनाओं को हिंदू आतंकवाद से जोड़ कर देखा जा रहा है उनके केंद्र में फौज का एक अफसर और एक सेवानिवृत्त अफसर भी था। इसलिए मैं कह रहा हूं कि इन घटनाओं के पीछे मास्टरमाइंड कौन है, यह पता करने की जरूरत है।

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